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गणेश चतुर्थी, जो भगवान गणेश का जन्मोत्सव है, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व 7 सितंबर 2024 को है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ लाभ का प्रतीक माना जाता है, जो अपने भक्तों के जीवन से सभी विघ्नों और बाधाओं का नाश करते हैं। जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी विष्णु विक्रम महाराज, जो 25 वर्षों से अधिक अनुभव वाले एक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, वास्तु शास्त्र विशेषज्ञ और प्रसिद्ध कथा वाचक हैं, गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष पूजा विधि और चमत्कारी उपायों का महत्व समझा रहे हैं।
गणेश चतुर्थी के इस पावन अवसर पर स्वामी जी के द्वारा बताए गए नियमों का पालन कर, जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है।
गणेश चतुर्थी 2024 की पूजा विधि:
मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त: भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए उनकी मूर्ति की स्थापना भी इस समय करना शुभ माना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन दोपहर 11:30 बजे से लेकर 1:30 बजे तक मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। इससे पहले पूजा स्थल की पूरी सफाई करें और उस स्थान पर गंगाजल का छिड़काव अवश्य करें ताकि घर में शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।
पूजन सामग्री: गणपति पूजन के लिए आवश्यक सामग्री में चावल, दूर्वा (घास), लाल फूल, रोली, मौली, सिंदूर, पान के पत्ते, सुपारी, घी, शुद्ध जल, मोदक, नारियल और कमल के पुष्प शामिल होते हैं। स्वामी विष्णु विक्रम महाराज बताते हैं कि भगवान गणेश को विशेष रूप से मोदक और दूर्वा अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए पूजा में इनका होना अनिवार्य है।
मूर्ति स्थापना का स्थान: गणपति की मूर्ति की स्थापना घर के उत्तर दिशा में करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि उत्तर दिशा को भगवान गणेश की दिशा कहा जाता है। उत्तर दिशा में स्थापित मूर्ति जीवन में शुभता और समृद्धि लाती है।
पूजा विधि: मूर्ति स्थापना के बाद भगवान गणेश की पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजा करें। गणेशजी को लाल वस्त्र अर्पित करें, उनके चरणों में दूर्वा, चावल, फूल और सिंदूर चढ़ाएं। इसके बाद, धूप-दीप जलाएं और 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करते हुए गणेशजी की आराधना करें। स्वामी जी के अनुसार, इस मंत्र का जाप गणेश चतुर्थी के दिन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
आरती और भोग: पूजा के अंत में भगवान गणेश की आरती करें और उन्हें मोदक का भोग लगाएं। स्वामी विष्णु विक्रम महाराज कहते हैं कि मोदक भगवान गणेश का अत्यंत प्रिय भोजन है और 21 मोदक का भोग विशेष रूप से लाभकारी होता है। इसके बाद प्रसाद का वितरण करें और घर के सभी
सदस्यों को पूजा में शामिल करें।
विशेष सलाह:
जिन भक्तों को विशेष ज्योतिषीय या व्यक्तिगत मार्गदर्शन की आवश्यकता है, वे जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी विष्णु विक्रम महाराज से संपर्क कर सकते हैं। स्वामी जी, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, और धार्मिक अनुष्ठानों के एक जाने-माने विशेषज्ञ हैं। वह देश-विदेश में हजारों भक्तों को मार्गदर्शन दे चुके हैं। स्वामी जी से संपर्क करने के लिए +91 80777 43172 पर कॉल करें।